श्रीकृष्ण का पूर्वोत्तर भारत से संबंध || कृष्ण जन्माष्टमी

The Northeast Dialogue
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आज पवित्र श्रीकृष्ण जन्माष्ठमी के पावन अवसर पर भगवान कृष्ण से जुड़े कुछ ऐतिहासिक कथाओं का स्मरण करना अच्छा रहेगा।

पूर्वोत्तर भारत के साथ भगवान श्रीकृष्ण के संबंध के बारे में अद्भुत घटनाएँ और पौराणिक कथाएँ इस क्षेत्र में पाई जाती हैं। लोगों का मानना है कि भगवान कृष्ण की पत्नी रुक्मिणी अरुणाचल प्रदेश की इदु मिश्मी जनजाति से थीं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, रुक्मिणी की इच्छा का सम्मान हेतु कृष्ण ने उनको उद्धार कर द्वारका ले गए थे। इदु मिश्मी समुदाय के सदस्यों के बीच रुक्मिणी के प्रसंग आज भी प्रचलित है। सुदूर अरुणाचल प्रदेश में लोअर दीबांग वैली ज़िले में रुक्मिणी के पिताश्री की नगरी भीष्मक नगर अवस्थित है।

द्वारका लौटते समय जब कृष्ण तलहटी में पहुँचे, तो पार्वती ने उनका स्वागत भगवान शिव के साथ मिलकर अपने बगीचे से तोड़े गए फूलों से बनी मालाओं से किया था। कृष्ण एक फूल की खुशबू से इतने मोहित हो गए कि उन्होंने पार्वती को मालिनी कहकर संबोधित किया, जिसका अर्थ है "बगीचे की मालकिन", जिसके लिए इस स्थान का नाम मालिनीथान पड़ा। मालिनीथान मंदिर लिकाबली से सिर्फ एक किलोमीटर की दूरी पर सियांग पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है।

श्री वासुदेव थान में एक अत्यंत मान्यताप्राप्त प्राचीन मंदिर है, जो असम के उत्तरी लखीमपुर जिले की सुबनसिरी तहसील में ढकुआखाना के पास स्थित है। मंदिर के बारे में कहा जाता है कि रुक्मिणी ने भगवान कृष्ण, जिन्हें वासुदेव भी कहा जाता है, को अपने पति के रूप में पाने के लिए उनकी मूर्ति बनवाई थी। इसलिए इस मंदिर को वासुदेव थान के नाम से भी जाना जाता है।

प्रसिद्ध अश्वक्लांत मंदिर उत्तरी गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र के तट पर स्थित है। यहां दो मंदिर हैं, और दोनों ही भगवान कृष्ण को समर्पित हैं। भगवान विष्णु की दो मूर्तियों की उपस्थिति मंदिर को अपनी एक विशिष्ट पहचान देती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण के घोड़े थक गए थे और उन्होंने यहीं विश्राम किया था, इसलिए इस स्थान का नाम अश्वक्लांत पड़ा।

भगवान कृष्ण ने राजा प्रह्लाद के प्रपौत्र शक्तिशाली बाण राजा के साथ भयंकर युद्ध लड़ा था। यह युद्ध भगवान कृष्ण के पोते अनिरुद्ध के अपहरण के बाद लढ़ा गया था। बाण राजा की पुत्री उषा को अनिरुद्ध से प्रेम हो गया था, और उसकी सहेली चित्रलेखा ने अपनी अलौकिक शक्तियों का उपयोग करके अनिरुद्ध को उषा के पास ले आई।  राजा बाण इस रिश्ते से खुश नहीं थे और उन्होंने अनिरुद्ध को वंदीगृह में डाल दिया, और उषा को उनसे मिलने से रोकने के लिए अग्निगढ़ में किला बनवाया, जो हर समय आग से घिरा रहता था। जिसके कारण स्वयं भगवान कृष्ण को अपने पोते को बचाने के लिए आना पड़ा था। भगवान शिव जी भी अपने भक्त बाण को बचाने आये। अंततोगत्वा उषा-अनिरुद्ध के विवाह हुआ, लेकिन इतना खून युद्ध में बहा था की उस स्थान का नाम तेज़पुर पड़ा। तेज का अर्थ असमिया भाषा में खून को कहा जाता है। तथा इस भीषण युद्ध के पश्चात शिव जी के दिए हुए आशीर्वाद के रूप में शिवलिंग के विशिष्ट प्रकार को बाण यह संज्ञा मिली। उस रूप में शिव भक्त शिव रूप में बाण की पूजा भी करते हैं।

महान चिंतक स्वर्गीय राम मनोहर लोहिया कहते थे, सनातन भारत में प्रभु श्रीराम ने उत्तर भारत को दक्षिण के साथ, एवं भगवान कृष्ण ने पूर्व भारत को पश्चिम के साथ उनके जीवन में घटित अनेक प्रसंगों के कारण एकात्म किए थे। आज जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर प्रभु श्रीकृष्ण को एकात्म भारत के अनन्य महान सहयोगी के नाते स्मरण करने की आवश्यकता है।

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